WHAT IS INTERNET ?

 WHAT IS INTERNET ?


इन्टरनेट एक दुसरे से जुड़े कई कंप्यूटरों का जाल है जो राउटर एवं सर्वर के माध्यम से दुनिया के किसी भी कंप्यूटर को आपस में जोड़ता है. दुसरे शब्दों में कहे तो सूचनाओ के आदान प्रदान करने के लिए TCP/IP Protocol के माध्यम से दो कंप्यूटरों के बीच स्थापित सम्बन्ध को internet कहते हैं. इन्टरनेट विश्व का सबसे बड़ा नेटवर्क है.

भारत में इन्टरनेट कब आया?

भारत में इन्टरनेट की शुरुआत 14 अगस्त 1995 को हो गयी थी लेकिन सार्वजानिक रूप से इसे 15 अगस्त 1995 को “विदेश संचार निगम लिमिटेड” यानि VSNL द्वारा चालू किया गया था। तब इन्टरनेट का इस्तेमाल महत्वपूर्ण सूचनाओं के आदान प्रदान करने के लिए किया गया था और इसकी स्पीड मात्र 8-10 kbps थी।

जब भारत में इन्टरनेट की शुरुआत हुई थी तब इससे मात्र 20-30 कंप्यूटर ही जुड़े थे और इन्टरनेट कनेक्शन का खर्च भी बहुत ज्यादा था, और 9-10 kbps स्पीड के इन्टरनेट का मासिक खर्चा 500-600 रूपये के आसपास था, जो कि उस समय के हिसाब से बहुत ही ज्यादा था.

जबकि आज के समय में इन्टरनेट प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में पहुँच चूका है और पढाई से लेकर व्यापार, चिकित्सा, तकनीक, सरकारी कार्यों इत्यादि तक में इन्टरनेट का प्रयोग होने लगा है.


इन्टरनेट एक इंग्लिश शब्द है जो इंग्लिश के ही एक और शब्द “Internetworked” से लिया गया है. Hindi में Internet का meaning होता है “अंतरजाल“. इन्टरनेट हजारों-लाखों कम्प्यूटरों का एक जाल है इसे हिंदी में अंतरजाल या फिर सामान्य भाषा में “महाजाल” भी कह सकते है.



इन्टरनेट का मालिक कौन है ? Owner of Internet

हार वस्तु का कोई न की मालिक तो होता ही है लेकिन अगर बात करे इन्टरनेट की, कि इन्टरनेट का मालिक कौन है या फिर इन्टरनेट पर किस का एकाधिकार है तो इस प्रश्न के दो उत्तर हो सकते है।

  1. कोई नहीं
  2. बहुत सारे लोग 
  3. COMPNIES

1. यहाँ कोई नहीं से तात्पर्य यह है कि इन्टरनेट का कोई भी एक मालिक नहीं है, और कोई भी देश या किसी भी देश की सरकार या कंपनी इन्टरनेट पर किसी भी प्रकार का एकाधिकार नहीं रखती है. कहने का तात्पर्य इन्टरनेट पर पूर्ण अधिकार किसी का भी नहीं है.

2. दूसरे दृष्टिकोण से, हजारों लोग और संगठन इंटरनेट के मालिक हैं. इंटरनेट में कई अलग-अलग बिट्स और टुकड़े होते हैं, जिनमें से प्रत्येक का एक मालिक होता है। इनमें से कुछ मालिक आपके पास इंटरनेट तक पहुंच की गुणवत्ता और स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। वे पूरे सिस्टम के मालिक नहीं हो सकते हैं, लेकिन वे आपके इंटरनेट के अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए “इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर कम्पनियां EXM. AIRTEL JIO ETC“.

History of Internet in Hindi (इन्टरनेट का इतिहास)

कहते है आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है. यह बात इन्टरनेट की खोज पर बिलकुल सटीक बैठती है. इन्टरनेट का इतिहास बहुत ज्यादा पुराना नहीं है. सन 1960 में शीत युद्ध के दौरान गुप्त रूप से बहुत तेज गति से सूचनाओं के आदान प्रदान करने की आवश्यकता हुई.

इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर एक नेटवर्क की खोज हुई, जिसे आज हम इन्टरनेट के नाम से जानते है. अगर बात की जाये कि इन्टरनेट की खोज किसने की इसमें किसी एक व्यक्ति को पूरा श्रेय नहीं दिया जा सकता है. इन्टरनेट का आविष्कार करने में कई लोगों का योगदान था. आइये इन्टरनेट के इतिहास और खोजकर्ताओं पर संक्षेप में जानते है.

इन्टरनेट की खोज किसने की?

इंटरनेट की खोज के पीछे कई लोगो का हाथ था. शीत युद्ध के दौरान सबसे पहले लियोनार्ड क्लेरॉक (Leonard Kleinrock) ने अमेरिकी रक्षा विभाग को एक नयी तकनीक से लैस करने की योजना बनायीं. इस योजना के अनुसार कई कंप्यूटरों को आपस में जोड़ कर सूचनाओं का आदान प्रदान करना था, जिससे कि सेना को जरुरी जानकारी बहुत जल्दी मिल जाए.

इस नेटवर्क को बनाने में उनका साथ दिया एम.आई.टी. के वैज्ञानिक J.C.R. Licklider और रोबर्ट टेलर (Robert Taylor) ने. जिन्होंने ने सन 1962 में कंप्यूटर का एक “Galactic Network” बनाने का प्रताव रखा. जिस पर लगातार काम होता रहा.

और 1965 में, एक और एम.आई.टी. वैज्ञानिक ने एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक जानकारी भेजने का एक तरीका विकसित किया जिसे “Packet Switching” कहा गया। पैकेट स्विचिंग डाटा को ब्लाक या पैकेट में तोड़ कर डाटा ट्रान्सफर करता था.

इस तकनीक की शुरुआत सबसे पहले संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग की Advance Research Projects Agency (ARPA) द्वारा की गई थी। जिस वजह से इसे ARPANET का नाम दिया गया. ARPANET में एक computer से दूसरे computer से जोड़ने के लिए NCP यानि कि (Network Control Protocol) का इस्तेमाल किया गया था.

October 29, 1969 को ARPAnet के माध्यम से पहला सन्देश “LOGIN” लिख कर भेजा गया, जो कि आंशिक रूप से सफल हुआ और सन्देश के पहले दो अक्षर “LO” का ही डाटा ट्रान्सफर हुआ.

1969 के अंत तक, ARPAnet से सिर्फ चार कंप्यूटर जुड़े थे, लेकिन 1970 के दौरान यह नेटवर्क लगातार बढ़ता गया। 1971 में, इसने University of Hawaii के ALOHAnet को जोड़ा और दो साल बाद इसने लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज और नॉर्वे के रॉयल रडार प्रतिष्ठान में नेटवर्क को जोड़ा।

जैसे ही इस नेटवर्क से बहुत सारे कंप्यूटर जुड़ते गए जिससे इसे  वैश्विक स्तर पर एकीकृत करना कठिन होता चला गया. सन 1971 में सबसे पहला Email Ray Tomlinson ने भेजा था। जैसे जैसे इसके फायदे का पता चलता गया वैसे वैसे ही इसका इस्तेमाल बढता गया.

1970 के दशक के अंत तक, विंटन सेर्फ नाम के एक कंप्यूटर वैज्ञानिक ने दुनिया के सभी मिनी-नेटवर्कों पर एक-दूसरे के साथ संवाद करने के लिए सभी कंप्यूटरों के लिए एक तरीका विकसित करके इस समस्या को हल करना शुरू कर दिया था। उन्होंने अपने आविष्कार को “ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल” या TCP कहा।

बाद में, उन्होंने एक अतिरिक्त प्रोटोकॉल जोड़ा, जिसे “इंटरनेट प्रोटोकॉल” IP के रूप में जाना जाता है। आज हम जिस इन्टरनेट का प्रयोग करते है उसमे TCP/IP Protocol का ही इस्तेमाल किया जाता है.

सन 1974 में विंट सर्फ (Vint Cerf) और रोबर्ट ई. काहन (Robert E. Kahn) ने एक पेपर प्रकाशित किया जिसे “The Fathers Of The Internet” के नाम से जाना गया. इसी रिसर्च पेपर को प्रकाशित करने के कारण Vint Cerf को इन्टरनेट का जनक कहते है.


भारत में इन्टरनेट कब आया?

भारत में इन्टरनेट की शुरुआत 14 अगस्त 1995 को हो गयी थी लेकिन सार्वजानिक रूप से इसे 15 अगस्त 1995 को “विदेश संचार निगम लिमिटेड” यानि VSNL द्वारा चालू किया गया था। तब इन्टरनेट का इस्तेमाल महत्वपूर्ण सूचनाओं के आदान प्रदान करने के लिए किया गया था और इसकी स्पीड मात्र 8-10 kbps थी।

जब भारत में इन्टरनेट की शुरुआत हुई थी तब इससे मात्र 20-30 कंप्यूटर ही जुड़े थे और इन्टरनेट कनेक्शन का खर्च भी बहुत ज्यादा था, और 9-10 kbps स्पीड के इन्टरनेट का मासिक खर्चा 500-600 रूपये के आसपास था, जो कि उस समय के हिसाब से बहुत ही ज्यादा था.

जबकि आज के समय में इन्टरनेट प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में पहुँच चूका है और पढाई से लेकर व्यापार, चिकित्सा, तकनीक, सरकारी कार्यों इत्यादि तक में इन्टरनेट का प्रयोग होने लगा है.



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